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baaghi 2 story | फिल्म रिव्यू: बागी 2


अगर आपने ‘बदलापुर’ देखी है, तो आपको पता होगा कि उसका इंट्रो सीन क्या था. फिल्म के टाइटल के नीचे भी लिखा था- ‘डोंट मिस द बिगनिंग’. ‘बागी 2’ का पहला सीन भी कुछ वैसा ही है. हालांकि अपने अंत तक पहुंचते-पहुंचते फिल्म ‘बदलापुर’ के बदले ‘टाइगर ज़िंदा है’ हो जाती है. फिल्मों के साथ आमतौर पर ऐसा होता है, आपने जो ट्रेलर में देखा है, उसी का एक्सटेंडेड वर्ज़न फिल्म में देखने जाते हैं. तो फिल्म के बारे में पता होता है. इसलिए हमें हर फिल्म को एक ही पैरामीटर पर आंकने के बदले अलग-अलग पैरामीटर्स क्रिएट करने चाहिए. अगर आप ‘बागी-2’ देखने जा रहे हैं, तो उससे आप ‘तहान’ या ‘अलिफ’ जैसी स्टोरी तो एक्सपेक्ट नहीं कर सकते. डायरेक्टर अगर आपको वही रीपीटेड चीजें ही अपने अंदाज में दिखाना चाहता है, तो उसे हमें उसी नज़र से देखना चाहिए.

‘बागी 2’ की यही यूएसपी है कि वो अलग या समानांतर सिनेमा होने का दावा नहीं करती. उसकी कहानी में हीरो है. हीरोइन है. लव स्टोरी है. एक्शन है. कॉमेडी है. फिल्म नाम की सब्जी को बनाने की यही रेसिपी होती है. उस लिहाज़ से टाइगर की ‘बागी-2’ बढ़िया है. फिल्म में एक चीज़ है जिसपर बात होनी चाहिए वो है टाइगर का इंट्रोडक्शन सीन.

टाइगर फिल्म में कमांडो बने हैं. जब वो पहली बार फिल्म में दिखाई देते हैं, तब बहुत सारी कंट्रोवर्सी लिए हुए आते हैं. आपने कश्मीर में हुए ‘ह्यूमन शील्ड’ केस के बारे में सुना होगा, जिसमें एक आर्मी ऑफिसर अपनी जीप के आगे एक आदमी को बांधकर पूरे गांव में घूमे थे. 09 अप्रैल, 2017 को कश्मीर के बडगाम जिले में ये घटना घटी थी. ये सीन बिलकुल ऑफेंसिव है. ये चीज़ ह्यूमन राइट्स के वॉयलेशन के घेरे में आती है. अगर आप फिल्म आर्मी या कश्मीर से जुड़े किसी टॉपिक पर बना रहे हैं, फिर तो आपका ये दिखाना एक बार को जायज़ मान भी लिया जाता. लेकिन अपने किरदार की बहादुरी और देशभक्ति साबित करने के लिए देश के सबसे विवादित मुद्दों में से एक को चुनना दो चीज़ें दर्शाता है. पहला, फिल्म को जबरदस्ती कंट्रोवर्सी में घुसेड़कर टिकट खिड़की पर उसका फायदा लेना और दूसरा, उस घटना को सही बताना.

आपने बहुत अच्छी फिल्म बनाई लेकिन आपकी फिल्म का सिर्फ एक सीन आपके सारे किए-कराए पर पानी फेर सकता है. इस घटना को लेकर एक अच्छी-खासी बहस शुरू हो गई थी और कई लोगों ने सेना के इस कदम को नैतिक रूप से गलत बताया था, भले ही वो तात्कालिक रूप से सही लगा हो. फिर जुलाई में जम्मू कश्मीर मानवाधिकार आयोग ने ह्यूमन शील्ड की तरह इस्तेमाल किए गए बेगुनाह फारूक अहमद दार को सरकार द्वारा 10 लाख रुपए हर्ज़ाना देने की सिफारिश की थी.

फिल्म में टोटल छह गाने हैं. एक को छोड़कर सारे गाने बेतरतीब ढंग से फिल्म में शामिल किए गए हैं. मिथुन का बनाया ‘लो सफर शुरू हो गया’ एकमात्र गाना है, जिसके आने के टाइम आप समझते हैं कि कुछ होने वाला है. कुछ शुरू होने वाला है. फिल्म के क्लाइमैक्स में एक सीन है, जहां टाइगर श्रॉफ दो बंदूक लेकर तकरीबन 100 आदमियों से भिड़ जाते हैं. जो हथियारों से भयानक तरीके से लैस हैं. यहां पर आपको समझ आता है कि कमर्शियल/मसाला/मास फिल्मों की कहानी सच्चाई से और फिल्म का हीरो दुश्मन की गोलियों से, हमेशा दूर रहता है. इसमें ऐसा लगता है कि टाइगर में सच में टाइगर (अविनाश सिंह राठोड़) की आत्मा घुस गई है. सीन का पिक्चराइजेशन भी ऑलमोस्ट वैसा ही है.
तमाम खामियों के बावजूद ‘बागी 2’ वो बनी है, जो बनाने की कोशिश थी. फिल्म में कुछ भी ऐसा नहीं है, जो बहुत लंबे समय तक आपको याद रहे. इतना सब कुछ करने के बावजूद ‘बागी 2’, आसानी से भुलाई जाने वाली फिल्मों की लिस्ट को लंबा करने के अलावा कुछ नहीं करती.

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